कोरोनाकाल में व्यापारियों ने जमकर की टैक्स चोरी,राज्य कर विभाग ने करोड़ों का पकड़ा माल,जानें जिलों का हाल
हल्द्वानी (संवाद-सूत्र)। उत्तराखंड राज्य कर विभाग ने बीते एक साल में टैक्स चोरी व अन्य मामलों में व्यापारियों का 76.52 करोड़ रुपये का माल पकड़ा है। इस अवधि में विभाग के सचल दल की टीमों ने कुल 1903 मामलों में कार्रवाई की। सबसे अधिक माल रुड़की, रुद्रपुर और देहरादून में पकड़ में आया।
हालांकि, व्यापारियों ने जीएसटी अफसरों पर अन्याय करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पकड़े गए माल पर भारी-भरकम अर्थदंड लगाना कतई उचित नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता क्लब उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी की ओर से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के आधार पर आयुक्त राज्य कर प्रवर्तन अनुभाग द्वारा यह जानकारी दी गई है।
बताया है कि 1 जनवरी 2021 से 1 जनवरी 2022 तक 11 सचल दल इकाइयों ने देहरादून में 351, विकासनगर में 82, हरिद्वार में 165, रुड़की में 526, भगवानपुर में 54, कोटद्वार में 136, काशीपुर में 239, रुद्रपुर में 435, किच्छा में 165, हल्द्वानी में 278 और खटीमा में 185 मामले पकड़े।
सचल दलों द्वारा पकड़े गए माल की अनुमानित कीमत
स्थान कीमत
देहरादून 2.62 करोड़
विकासनगर 30.33 लाख
हरिद्वार 6.77 करोड़
रुड़की 29.29 करोड़
भगवानपुर 39.14 लाख
कोटद्वार 2.87 करोड़
काशीपुर 2.84 करोड़
रुद्रपुर 19.11 करोड़
किच्छा 4.27 करोड़
हल्द्वानी 4.98 करोड़
खटीमा 3.03 करोड
जीएसटी लगने के बाद उत्पीड़न में इजाफा
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी का कहना है कि ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जीएसटी लगने के बाद व्यापारियों के उत्पीड़न में भारी इजाफा हुआ है। जितने भी मामले पकड़े गए हैं, अधिकांश में बिना बिल का माल नहीं होता है। ऐसे भी मामले होते हैं, जिनमें बिल संबंधी कोई भी तकनीकी दिक्कत होती है। विभाग ऐसे माल को भी अभिग्रहित कर लेता है। सहायक आयुक्त राज्य कर सचल दल इकाई विकासनगर द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि उनके द्वारा 82 मामलों में जो माल पकड़ा गया।
उसकी अनुमानित कीमत 30 लाख आंकी गई। जबकि विभाग द्वारा उस माल पर कर एवं अर्थदंड लगभग 48 लाख जमा करवाया गया। यह अपने आप में जीएसटी की आड़ में जीएसटी अधिकारियों द्वारा व्यापारियों के प्रति किया जा रहा अन्याय है। गोल्डी ने कहा कि सचल दल अधिकारियों को व्यापारियों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक दृष्टिकोण रखना चाहिए।

