प्रचंड बहुमत में भी ऊधमसिंह नगर की बाजी ‘हारी’ भाजपा, अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने में नाकाम रही पार्टी
रुद्रपुर (संवाद-सूत्र)। उत्तराखंड में भाजपा को प्रचंड बहुमत के बाद भी ऊधमसिंह नगर जिले में भाजपा, कांग्रेस से पिछड़ गई। खुद सीएम पुष्कर सिंह धामी खटीमा विस क्षेत्र से चुनाव हार गए। भाजपा इस चुनाव में सिर्फ चार सीटों पर सिमटकर रह गई। जबकि कांग्रेस ने पिछले चुनाव की अपेक्षा चार सीटें अधिक जीतीं। पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास जिले में सिर्फ जसपुर सीट ही थी। जबकि इस बार आंकड़ा पांच तक पहुंच गया। कांग्रेस ने दमदार तरीके से जिले में वापसी की है।
ऊधमसिंह नगर जिले के चुनावी नतीजे कांग्रेस को ऊर्जा देने वाले हैं। पिछले चुनाव में सिर्फ जसपुर सीट पर कांग्रेस कब्जा था। इस बार जसपुर के साथ ही कांग्रेस ने बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता और खटीमा सीट भी अपनी झोली में डाल ली। इस बार चुनाव से पूर्व कांग्रेस ने जिले से दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दांव खेला। किच्छा से चुनाव मैदान में उतरे तिलकराज बेहड़ और खटीमा से सीएम के खिलाफ उतरे भुवन चंद्र कापड़ी को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उनका कद बढ़ाया था।
कांग्रेस का बेहड़ को किच्छा से चुनाव मैदान में उतराने का दांव एकदम सटीक रहा। यहां से 10 साल बाद कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वहीं कापड़ी के खिलाफ सीएम धामी के चुनाव मैदान में होने के बावजूद उनका कद बढ़ाकर उन्हें कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाने की कांग्रेस की रणनीति यहां भी काम कर गई। खास बात यह कि कांग्रेस ने जिले में पांच सीटें जीतीं और भाजपा जिन सीटों पर जीती है, उन सीटों पर भी भाजपा का मार्जिन कम हुआ है। ऐसे में भाजपा के खाते में सिर्फ चार ही सीटें जिले में आईं।
रुद्रपुर सीट की बात करें तो यहां से दस साल से भाजपा के टिकट पर विधायक रहे राजकुमार ठुकराल इस बार निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे। वहीं कांग्रेस से भी लगातार दस साल से प्रत्याशी रहे बेहड़ ने रुद्रपुर को छोड़कर किच्छा का चुनावी रण चुना था। कांग्र्रेस से यहां से पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा चुनाव मैदान में थी। भाजपा प्रत्याशी शिव अरोरा ने रुद्रपुर से दमदार जीत दर्ज करते हुए भाजपा के अभेद्य किले को कांग्रेस से भेदने से पूरी तरह रोक दिया।
दोहरे मोर्चे पर भाजपा के खिलाफ प्रतिद्वंद्वी मीना शर्मा और ठुकराल के होने के बावजूद शिव अरोरा के सटीक चुनावी प्रबंधन की कला ने भाजपा को रुद्रपुर से जिले में सबसे बड़ी जीत दिलाई। उन्होंने 60,602 मत हासिल किए जो पिछले चुनाव में मिले वोटों से करीब छह हजार वोट कम हैं लेकिन उन्होंने रुद्रपुर से 19,750 वोटों से बड़ी जीत हासिल की। कांग्रेस ने रुद्रपुर में प्रत्याशी बदला लेकिन कांग्रेस की किस्मत यहां नहीं बदली। कांग्रेस प्रत्याशी मीना शर्मा का प्रदर्शन पूर्व में प्रत्याशी रहे बेहड़ से भी कमजोर रहा। पिछले चुनाव की अपेक्षा कांग्रेस को यहां से करीब साढ़े तीन हजार कम वोट मिले।
खटीमा में मिली हार की भाजपा को रहेगी टीस
भाजपा के सीएम पद का चेहरा रहे और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा विस क्षेत्र से 6579 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी भुवन कापड़ी से चुनाव हार गए। पिछले दस सालों से यहां से विधायक के तौर पर धामी चुनाव जीतते आए थे। पिछले चुनाव में कापड़ी के साथ उनका नजदीकी मुकाबला रहा था। इस बार सीएम होने के चलते भाजपा यहां से बढ़त के साथ जीत की उम्मीद लगा रही थी लेकिन कापड़ी को जनता का भरपूर समर्थन मिला। सीएम धामी का गृह क्षेत्र होने और सीएम के तौर पर भारी-भरकम कद होने के चलते यहां से भाजपा को जीत की उम्मीद थी लेकिन युवा चेहरे कापड़ी ने सारे कयासों को धता बताते हुए यहां से बड़ी जीत दर्ज की। जिले में खटीमा में मिली हार की भाजपा को कई सालों तक टीस रहेगी।
काशीपुर का किला बचा ले गए हरभजन चीमा
काशीपुर से चार बार विधायक रहे हरभजन सिंह चीमा के बेटे त्रिलोक सिंह चीमा को टिकट देने का दाव भाजपा का सटीक साबित हुआ। चीमा के प्रभाव के चलते यहां भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की। यहां मुकाबला पूरी तरह एकतरफा रहा और चीमा के बेटे त्रिलोक सिंह चीमा ने यहां से 16335 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा के बेटे नरेंद्र चंद सिंह को यहां 32173 वोटों से संतोष करना पड़ा।
निर्दलीय मैदान में उतरे ठुकराल हुए पस्त
निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे राजकुमार ठुकराल अपने राजनीतिक जीवन में यह पहला चुनाव हारे। भाजपा से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में उतरे ठुकराल को रुद्रपुर से जीत की उम्मीद थी। ठुकराल निर्दलीय लड़े लेकिन भाजपा के कॉडर वोटों के आगे ठुकराल का जीत का रिकार्ड भी ध्वस्त हो गया। हालांकि, ठुकराल ने 26988 वोट हासिल कर लिए।
मोदी मैजिक रहा बरकरार
रुद्रपुर विधानसभा सीट में पीएम नरेंद्र मोदी ने जनसभा की थी। रुद्रपुर सीट भाजपा की सबसे मजबूत सीट मानी जाती है। यहां पीएम नरेन्द्र मोदी की रैली का भी साफ तौर पर असर दिखा। यहां से शिव अरोरा ने 19750 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की। पीएम मोदी ने जब भी रुद्रपुर में चुनावी सभा की है तो भाजपा को कभी हार नहीं मिली है।

