दादा यूपी के, पिता रह चुके उत्तराखंड के सीएम, अब पोता बना धामी कैबिनेट में मंत्री



रुद्रपुर (संवाद-सूत्र)। युवा चेहरा के साथ ही राजनीतिक में मजबूत पकड़ का सौरभ बहुगुणा को लाभ मिला। यहीं नहीं, सौम्य व्यवहार व कुशन नेतृत्व के साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी के करीबी मित्रों में एक हैं। सौरभ के पिता उत्तराखंड के कांग्रेस से सीएम थे तो उनके दादा हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तर प्रदेश के सीएम थे।

        यूएस नगर की नौ सीटों में इस बार चार सीटों पर कमल तो पांच सीटों पर हाथ का पंजा जीता है। सितारगंज से भाजपा प्रत्याशी सौरभ बहुगुणा ने दूसरी बार चुनाव जीते हैं। इससे पहले वह वर्ष, 2017 में कांग्रेस प्रत्याशी मालती विश्वास को हराया था।

      वर्ष 2012 में कांग्रेस की सरकार बनी तो सौरभ के पिता विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया गया, हालांकि उस समय वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे। सीएम बनने के बाद बहुगुणा ने सितारगंज के भाजपा विधायक किरण मंडल की सीट खाली कर उपचुनाव लड़े थे और भारी बहुमत मतों से जीत दर्ज की थी।

       विजय बहुगुणा के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा उस समय उत्तर प्रदेश के कांग्रेस से सीएम थे, जब उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग नहीं हुआ था। उत्तर प्रदेश की भाजपा की पिछली सरकार में सौरभ की बुआ रीता बहुगुणा जोशी मंत्री थीं। सौरभ को एक तरह से राजनीतिक विरासत मिली है।

सौरभ अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते थे और निस्तारण कराने के प्रयास करते थे। इस वजह से उनकी जनता में अच्छी खासी पकड़ है। बंगाली समाज के विद्यार्थियों के प्रमाण पत्रों पर लिखे जाने वाले पूर्वी पाकिस्तान शब्द को हटाने के सौरभ ने भी प्रयास भी किए थे और सफल भी हुए। वह हमेशा जनता की आवाज को उठाते रहते हैं और संगठन की मजबूती के लिए भी काम करते रहे हैं।

       राजनीतिक विरासत के साथ ही युवा चेहरा व सीएम के नजदीकी होने से उन्हें मंत्री बनने का मौका मिला। खटीमा से सटा सितारगंज है, ऐसे में सौरभ को मंत्री बनाए जाने से खटीमा, तराई-भाबर के साथ राज्य का विकास को गति दी जा सकेगी।