फिर हारे हरीश रावत, जानिए पांच अहम कारण
हल्द्वानी (संवाद-सूत्र)। उत्तराखंड की लालकुआं सीट आखिरी समय में वीआइपी बन गई। कारण था कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत का यहां से चुनाव लड़ना। पिछले 2017 के चुनाव में वह दो सीटों हरिद्वार ग्रामीण व किच्छा से खड़े थे। दोनों सीटों से करारी हार मिली थी। वहीं 2022 में भी कमोबेश वही इतिहास दोहराया है। वह आखिरी चरणों की मतगणना में करीब 10 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं। बस हार के घोषणा की औपचारिकता बाकी है।
क्या रहे हार के कारण
पूर्व सीएम हरीश रावत हार के कारणों में प्रमुख रहा अंतिम समय में सीट में बदलाव, पार्टी में गुटबंदी, भितरघात, जमीनी स्तर पर कमजोर पकड़ व दावों की राजनीति करना।
उत्तराखंड में हरदा के नाम से विख्यात पूर्व सीएम हरीश रावत से बड़ा कांग्रेस में कोई चेहरा नहीं है। पर चुनाव में आखिरी समय में सीट के बदलाव से पार्टी के अपने नेता ही बिगड़ गए। इससे कई ने बगावत कर दी।
पहले रामनगर फिर लालकुआं से सीट पर खड़े होने से उनकी हालत खराब हुई। पार्टी के अंदर किरकिरी भी हुई। इसके अलावा सीट में बदलाव से इनके सहयोगी नेताओं ने बगावत किया जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा। कई ने निर्दलीय खड़े होकर वोट काटने का काम किया।
इसके अलावा हरीश रावत क्षेत्र में चुनाव के समय में ही नजर आए। वह जमीन स्तर पर काम नहीं करते दिखाई दिए। अधिक समय देहरादून में दिखे और चुनाव में वह कुमाऊं में दिखे। दावों की राजनीति भी भारी पड़ी। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अक्सर पोस्ट व ट्वीट कर सनसनी फैलाते रहे हैं। इससे पार्टी हाईकमान से लेकर आम कार्यकर्ता तक असमंजस में रहा। यह पांच कारण हरीश रावत को धराशायी करने के प्रमुख कारण रहे।
दावों की राजनीति व सोशल मीडिया पर पोस्ट से सभी परेशान थे। आलम यह था मतगणना के कुछ घंटे पहले तक उन्होंने फेसबुक पोस्ट व ट्वीट कर भाजपा पर मतगणना में धांधली का आरोप लगाया था।

